
22 रजब ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) के बारे मे – Imam Jaffar Sadiq a.s.
ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) इस्लाम के छठे इमाम हैं। उनकी पैदाइश (जन्म) 17 रबी-उल-अव्वल को मदीना में हुई थी। उनके पिता का नाम इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ.स.) और माता का नाम उम्मे फरवा था। उन्हें ‘सादिक़’ कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने पूरे जीवन में केवल सत्य का प्रचार किया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) का — तआरुफ़ व तारीख़ी शख़्सियत – Imam Jaffar Sadiq a.s.
आपका पूरा नाम – अबू अब्दुल्लाह जाफ़र इब्न मुहम्मद अल-सादिक
विलादत 17 रबीउल अव्वल 83 हिजरी / 702 ईसवी — मदीना
वफ़ात 25 शव्वाल 148 हिजरी / 765 ईसवी — मदीना
आपका मदफ़न – जन्नतुल बक़ी, मदीना
वालिद ईमाम मुहम्मद बाक़िर अ०स०
वालिदा उम्मे फरवा बिन्त अल-क़ासिम
ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) की उपलब्धियाँ – (Achievements of Imam Jaffar Sadiq a.s.)
ईमाम का दौर “इल्म (ज्ञान) का स्वर्ण युग” माना जाता है। उनकी मुख्य उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
इल्मी यूनिवर्सिटी (University): उन्होंने मदीना में एक विशाल मदरसा स्थापित किया, जहाँ लगभग 4,000 छात्र एक साथ शिक्षा प्राप्त करते थे।
विज्ञान में योगदान: इमाम ने केवल धर्म ही नहीं, बल्कि रसायन विज्ञान (Chemistry), चिकित्सा (Medicine) और खगोल विज्ञान (Astronomy) पर भी शोध किया।
फ़िक़्ह (Jurisprudence): उन्होंने इस्लामी कानूनों को इतनी स्पष्टता से समझाया कि शिया विचारधारा को ‘फ़िक़्ह-ए-जाफ़रिया’ कहा जाने लगा।
ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) के प्रसिद्ध शिष्य – (Famous Students of Imam Jaffar Sadiq a.s.)
ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) के पास शिक्षा प्राप्त करने वाले कई लोग बाद में स्वयं महान विद्वान बने:
1. जाहिर इब्न हय्यान (Jabir ibn Hayyan): इन्हें दुनिया का पहला बड़ा केमिस्ट माना जाता है। इन्होंने अपनी केमिस्ट्री की सारी खोज इमाम से सीखी थीं।
2. ईमाम अबू हनीफ़ा: सुन्नी हनफी मज़हब के संस्थापक। उन्होंने इमाम जाफ़र सादिक़ के सानिध्य में दो साल बिताए और कहा था— “अगर वे दो साल न होते, तो मैं बर्बाद हो जाता।”
3. ईमाम मालिक इब्न अनस (मालिकी फ़िक़्ह के इमाम)
4. हिशाम इब्न अल-हकम: ये तर्कशास्त्र (Logic) के बहुत बड़े विद्वान थे और इमाम के प्रिय शिष्यों में से एक थे।

22 रजब और ‘कुंडे’ की नियाज़ ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) – (22 Rajab, Niyaz of Imam Jaffar Sadiq a.s.)
22 रजब को ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) के नाम पर ‘कुंडे’ की नियाज़ (प्रसाद) की परंपरा है। इसके बारे में इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) खुद फरमाते हैं कि 22 रज़ब को जब उन्हें अल्लाह पाक ने मकाम ए गौसियत ए कुबरा अता फरमाई तो इसपर अल्लाह का शुक्र अदा करने के लिए उन्होंने गरीबों वा मास्किनों को अल्लाह की राह में खीर और पूरी मिट्टी के कुंडे (मिट्टी के बर्तन) में खिलाया।
जिस तरह पैगम्बर मुहम्मद सल्लाहों अलैहि वसल्लम ने 18 ज़िलहिज़्ज़ा को ग़दीर ए ख़ुम के मैदान में हज़रत अली का हाथ पकड़ कर कहा था कि जिसका मैं मौला उसका अली मौला है (मनकुन्तो मौला फ़हाज़ा अली उन मौला) और जिसका मैं वली उसका अली वली है (अली उन वली उल्लाह) है, (तिर्मिज़ी शरीफ़ हदीस नंबर 3713 और 3786) । इस तरह रबी उल आखिर महीने की 11 तारीख़ को हज़रत अब्दुल कादिर जिलानी गौस पाक र०अ० की याद में ग्यारहवीं शरीफ़ मनाई जाती हैं। यानी हर अल्लाह के वली का एक दिन ख़ास होता है, इसलिए 22 रज़ब को इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) की याद में कुंडे में खीर, पूरी या खस्ते की फातिहा दिलाई जाती हैं और सभी को खिलाया जाता हैं।
धार्मिक महत्व: इस्लाम में किसी भी ईमाम या नेक इंसान के नाम पर खाना खिलाना (ईसाले सवाब) जायज़ है। 22 रजब को भी इसी भावना के साथ मनाना चाहिए।
ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) की शहादत- (Martyrdom of Imam Jaffar Sadiq a.s.)
ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) को अब्बासी खलीफा मंसूर द्वारा ज़हर देकर शहीद कर दिया गया था। उनका मज़ार (मकबरा) मदीना के जन्नत-उल-बक़ी कब्रिस्तान में स्थित है।
22 Rajab ko Ameer Muawiya ka urs manane walo ke liye Dr. Tahir ul Qadri ka bayan